जिस दिन मैंने अधिवक्ता-हित के लिए बार काउंसिल सदस्य के चुनाव में उतरने का निर्णय लिया, उसी दिन मन-ही-मन यह ठान लिया था कि केवल चुनाव नहीं लड़ना है, बल्कि अपने प्रदेश के अधिवक्ताओं की वास्तविक समस्याओं और उनकी आवाज़ को मजबूती से उठाना है। इसी भावना के साथ पिछले कई महीनों से मैं प्रदेश के कोने-कोने में गया, आप सभी माननीय साथियों से मिला, आपकी बातें सुनी, और उसी का परिणाम है हमारा 32 सूत्रीय संकल्प पत्र — जो केवल कागज़ नहीं, बल्कि आपके विश्वास और मेरे वचन का दस्तावेज़ है।
मैंने संकल्प पत्र को नामांकन से पहले सोशल मीडिया और सभी अधिवक्ता समूहों में साझा करके बार-बार आप सभी को अवगत कराया है कि यदि आप मुझे अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजते हैं, तो यह 32 सूत्रीय संकल्प पत्र मेरा चुनावी वादा नहीं—मेरी जिम्मेदारी और मेरी लड़ाई होगी। संघर्ष चाहे जितना भी कड़ा क्यों न हो, मैं इसे पूरा करवाने के लिए हर स्तर पर खड़ा रहूँगा।
मैंने अलग-अलग जिलों में जाकर माननीय साथियों से मुलाकात की है, कई साथियों के नाम और नंबर अपनी डायरी में लिखे हैं, ताकि यदि आप मुझे चुनकर भेजते हैं, तो समय-समय पर आप ही मुझे सचेत करते रहें—“जो वादा किया था, उसे पूरा करो।”
मैं किसी और प्रत्याशी की तरह पेन, डायरी, गिफ्ट, पार्टी या कैलेंडर देकर वोट नहीं मांगता। सच कहूँ तो मैं इन सब का पूरी तरह विरोधी हूँ। आज तक एक कप चाय तक किसी को सिर्फ वोट के लिए नहीं पिलाई। मेरा संघर्ष, मेरी नीयत और मेरा काम—ये ही मेरी पूंजी है। छात्र जीवन से लेकर आज तक जो भी किया, पूरे दिल से, सबके लिए किया।
आ अत्यंत विनम्र भाव से, हाथ जोड़कर आप सभी माननीय से एक ही निवेदन है—आपके पास 25 वोट हैं। उन 25 में से केवल एक वोट मैं आपसे मांग रहा हूँ। यह वोट मेरे लिए सम्मान नहीं, एक जिम्मेदारी है—आपके विश्वास को निभाने की जिम्मेदारी।
मुझे आशा नहीं—आप सभी पर पूर्ण विश्वास है कि आप मेरे इस निवेदन को स्वीकार करने की कृपा अवश्य करेंगे।


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